"तुम हर रोज जिसे याद करते हो और तुम कहते हो आप कभी दिखाई नही देते हो ? मैं वही हूँ। अब मैं तुम्हारे साथ केवल एक दिन रहना चाहता हूँ" ,वह नवागुन्तक बोला।
अनुज को बहुत आश्चर्य हुआ ।और वह सोचने लगा कि मै हर रोज किसकी याद करता हूँ उसकी समझ में ही नहीं आरहा था।
आगुन्तक बोला," शायद तुम्हें याद नही आरहा है । तुम मुझे उठते बैठते याद करते हो हे भगवान मेरी हैल्प करो।? मैने ही तुमको आफिस का साहब बनाया है। और तुम आज मुझे पहचान ही नही रहे हो? तुम हर रोज मुझसे पूछते थे कि भगवान आप मुझे दिखाई क्यौ नही देते हो ? आज मै तुम्हारे पास आया हूँ और तुम मुझे पहचानना तो दूर मुझे बैठने के लिए भी नही कह रहे हो?"
"ओह ! तो आप भगवान हो ? क्यौ मजाक कररहे हो भगवान और इस कलयुग में ना बाबा तुम इतना बडा़ झूँठ क्यौ बोलरहे हो ?" , अनुज हसता हुआ बोला।
" मै भगवान ही हूँ। आज केवल एक दिन मैं तुम्हारे साथ ही रहूँगा। केवल तुम्हें ही दिखाई दूँगा। और किसी को नजर नहीं आऊँगा। आज तुम एक दिन मुझे अपने साथ पाओगे।" वह बोले।
उसी समय वहाँ पर अनुज की मम्मीआगयी और वह उसे पूछने लगी," अनू बेटा यह तू अकेले अकेले किससे बात कर रहा है । तेरे पास कोई दूसरा तो खडा़ नही है। तेरे हाथ में फौन भी नही है। "
अनुज बोला," नहीं मम्मी मै किसीसे भी बात नहीं कर रहा हूँ मै यहाँ अकेला खडा हूँ।"
अपनी मम्मी की बात सुनकर अब अनुज को विश्वास होगया कि मुझसे जो बात कर रहे हैं वह भगवान ही है क्यौकि मेरी मम्मी को वह दिखाई नही देरहे है। उन्होंने कहा भी था कि वह केवल मुझे ही दिखाई देंगे। "
फिर माँ बोली ," चाय तैयार है , चल आजा अंदर.."*
*अब उनकी बातों पे थोड़ा बहुत यकीन होने लगा था, और मन में थोड़ा सा डर भी था.. वह जाकर सोफे पर बैठा ही था, तो बगल में वह आकर बैठ गए। चाय आते ही जैसे ही पहला घूँट पिया वह गुस्से से चिल्लाया, *"अरे मां..ये हर रोज इतनी चीनी ?
*इतना कहते ही अनुज को ध्यान आया कि अगर ये सचमुच में ईश्वर है तो इन्हें कतई पसंद नही आयेगा कि कोई अपनी माँ पर गुस्सा करे। अपने मन को शांत किया और समझ भी लिया कि 'भई, तुम किसी की नज़र में हो आज ज़रा ध्यान से।'*
*बस फिर वह जहाँ- जहाँ. वह अनुज के पीछे-पीछे पूरे घर में थोड़ी देर बाद नहाने के लिये जैसे ही वह बाथरूम की तरफ चला, तो उन्होंने भी कदम बढ़ा दिए..*
वह बोला ,*"प्रभु, यहाँ तो बख्श दो..."*
*खैर, नहा कर, तैयार होकर वह पूजा घर में गया, यकीनन पहली बार तन्मयता से प्रभु वंदन किया, क्योंकि आज अपनी ईमानदारी जो साबित करनी थी.. फिर आफिस के लिए निकला, अपनी कार में बैठा, तो देखा बगल में महाशय पहले से ही बैठे हुए हैं। सफ़र शुरू हुआ तभी एक फ़ोन आया, और वह फ़ोन उठाने ही वाला था कि ध्यान आया, कि 'तुम आज किसी की नज़र मे हो।'*
* अनुज ने कार को साइड मे रोका, फ़ोन पर बात की और बात करते-करते कहने ही वाला था कि इस काम के ऊपर के पैसे लगेंगे' पर ये तो गलत था, पाप था तो प्रभु के सामने कैसे कहता तो एकाएक ही मुँह से निकल गया,"आप आ जाइये । आपका काम हो जाएगा, आज।"*
*फिर उस दिन आफिस में न स्टाफ पर गुस्सा किया, न किसी कर्मचारी से बहस की 25-50 गालियाँ तो रोज़ अनावश्यक निकल ही जाती थी मुँह से ।पर आज सारी गालियाँ, 'कोई बात नही, इट्स ओके.मे तब्दील हो गयीं।*
आफिस के लोग भी उसके ब्यबहार पर आश्चर्य चकित थे। वह सोचरहे थे कि यह सख्स आज इतना कैसे बदल गया है। न किसी पर नाराज होरहा है। सबका काम फटाफट पूरा कर रहा है आज इसकी टेबल पर फाइलौ की भीड़ भी नहीं है।
*वह पहला दिन था जब क्रोध, घमंड, किसी की बुराई, लालच, अपशब्द , बेईमानी, झूठ ये सब उसकी दिनचर्या का हिस्सा नही बनें।*
*शाम को आफिस से निकला, कार में बैठा, तो बगल में बैठे ईश्वर को बोल ही दिया. ,*"प्रभु सीट बेल्ट लगा लें, कुछ नियम तो आप भी निभायें। उनके चेहरे पर संतोष भरी मुस्कान थी.।"
*घर पर रात्रि भोजन जब परोसा गया तब शायद पहली बार उसके मुख से निकला,* ! प्रभु, पहले आप लीजिये ।"*
*और उन्होंने भी मुस्कुराते हुए निवाला मुँह मे रखा।
भोजन के बाद माँ बोली,* *"पहली बार खाने में कोई कमी नही निकाली आज तूने। क्या बात है ? सूरज पश्चिम से निकला है क्या, आज?"*
अनुज बोला , *"माँ आज सूर्योदय मन में हुआ है ।रोज़ मैं महज खाना खाता था, आज प्रसाद ग्रहण किया है माँ, और प्रसाद मे कोई कमी नही होती।"*
*थोड़ी देर टहलने के बाद अनुज अपने कमरे मे गया, शांत मन और शांत दिमाग के साथ तकिये पर अपना सिर रखा तो ईश्वर ने प्यार से सिर पर हाथ फिराया और कहा,*"आज तुम्हे नींद के लिए किसी संगीत, किसी दवा और किसी किताब के सहारे की ज़रुरत नहीं है।
गालों की थपकी ने गहरी नींद को हिला दिया ।"
*"कब तक
*सपना था शायद। हाँ, सपना ही था । पर आज का यह सपना अनुज की जीवन की गहरी नीँद से जगा गया। अब समझ में आ गया उसका इशारा "
*"तुम मेरी नज़र में हो...।"*
*हम सी सी टीवी केमरे से तो डर जाते है लेकि ईश्वर के कैमरे से क्यौ नही रतेजिसकी नजर मे हम हमेशा रहते है। जिस दिन हम ये समझ गए कि हमे वो" देख रहा है, उस दिन से हमारी जीवन यात्रा सरल व सुखद हो जायेगी. हमारी सारी समस्याऔ का अन्त हो जायेडा। ऊपरवालै का कैमरा 24 घन्टे चलता ही रहता है। उससे हम क्यौ नहीं डरते है।
इस एक दिन के सपने ने अनुज के जीवन को कितना सरल बना दिया। इसी तरह हमारा जीवन भी सरल बन सकता है यदि हम यह सोचले कि हम उसकी नजर में है।
आज की दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना।
नरेश शर्मा "
प्रत्यंगा माहेश्वरी
07-Apr-2023 07:35 AM
बहुत खूब 👌
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shahil khan
06-Apr-2023 09:56 PM
nice
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Mohammed urooj khan
06-Apr-2023 04:59 PM
शानदार 👌👌👌
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